अंडाशय में पुटी (Ovarian Cyst) महिलाओं में पाई जाने वाली एक सामान्य स्त्रीरोग संबंधी समस्या है। यह एक तरल पदार्थ या अर्ध-ठोस पदार्थ से भरी हुई थैली होती है, जो अंडाशय (Ovary) के भीतर या उसकी सतह पर विकसित हो सकती है। अधिकांश ओवरिअन सिस्ट हानिरहित होती हैं और बिना किसी उपचार के अपने आप समाप्त हो जाती हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये दर्द, अनियमित मासिक धर्म, बांझपन या अन्य जटिलताओं का कारण बन सकती हैं।
ओवरिअन सिस्ट क्या होती है?
महिलाओं के शरीर में दो अंडाशय होते हैं जो अंडाणु (Eggs) बनाने और हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरोन का उत्पादन करने का कार्य करते हैं। जब अंडाशय में किसी कारणवश तरल पदार्थ से भरी थैली बन जाती है, तो उसे ओवरिअन सिस्ट कहा जाता है।
अधिकांश सिस्ट प्रजनन आयु (Reproductive Age) की महिलाओं में पाई जाती हैं और अक्सर मासिक धर्म चक्र से संबंधित होती हैं।
ओवरिअन सिस्ट के प्रकार
1. फंक्शनल सिस्ट (Functional Cyst)
यह सबसे सामान्य प्रकार की सिस्ट है और मासिक धर्म चक्र के दौरान बनती है।
- फॉलिकुलर सिस्ट (Follicular Cyst)
- कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट (Corpus Luteum Cyst)
ये आमतौर पर कुछ महीनों में स्वयं समाप्त हो जाती हैं।
2. डर्मॉइड सिस्ट (Dermoid Cyst)
इसमें बाल, त्वचा, वसा या अन्य ऊतक मौजूद हो सकते हैं। यह जन्मजात कोशिकाओं से विकसित होती है।
3. एंडोमेट्रियोमा (Endometrioma)
यह एंडोमेट्रियोसिस नामक बीमारी से जुड़ी होती है, जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी कोशिकाएं अंडाशय पर बढ़ने लगती हैं।
4. सिस्टाडेनोमा (Cystadenoma)
यह अंडाशय की सतह पर विकसित होने वाली सिस्ट होती है और कभी-कभी काफी बड़ी हो सकती है।
5. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)
इस स्थिति में अंडाशय में कई छोटी-छोटी सिस्ट दिखाई देती हैं और हार्मोनल असंतुलन उत्पन्न होता है।
ओवरिअन सिस्ट के कारण
ओवरिअन सिस्ट बनने के कई कारण हो सकते हैं:
- हार्मोनल असंतुलन
- गर्भावस्था
- एंडोमेट्रियोसिस
- पेल्विक इंफेक्शन
- पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)
- पहले से मौजूद ओवरिअन सिस्ट
- कुछ प्रजनन उपचार (Fertility Treatments)
ओवरिअन सिस्ट के लक्षण
छोटी सिस्ट अक्सर कोई लक्षण उत्पन्न नहीं करतीं, लेकिन सिस्ट का आकार बढ़ने पर निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- पेट के निचले हिस्से में दर्द
- श्रोणि (Pelvic) क्षेत्र में दबाव या भारीपन
- मासिक धर्म का अनियमित होना
- संभोग के दौरान दर्द
- बार-बार पेशाब आने की इच्छा
- पेट फूलना
- मतली या उल्टी
- कमर दर्द
यदि सिस्ट फट जाए या अंडाशय मुड़ जाए (Ovarian Torsion), तो अचानक और अत्यधिक दर्द हो सकता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
निम्नलिखित स्थितियों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए:
- अचानक तेज पेट दर्द
- चक्कर आना या बेहोशी
- तेज बुखार
- लगातार उल्टी
- अत्यधिक पेट फूलना
ओवरिअन सिस्ट की जांच
सटीक निदान के लिए निम्नलिखित जांच की जा सकती हैं:
अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)
यह सबसे महत्वपूर्ण जांच है जो सिस्ट के आकार, प्रकार और स्थान की जानकारी देती है।
सीटी स्कैन या एमआरआई
जटिल मामलों में अतिरिक्त जानकारी के लिए।
रक्त जांच
कुछ विशेष ट्यूमर मार्कर जैसे CA-125 की जांच की जा सकती है, विशेष रूप से यदि कैंसर की संभावना हो।
गर्भावस्था परीक्षण
कुछ प्रकार की सिस्ट गर्भावस्था से संबंधित हो सकती हैं।
ओवरिअन सिस्ट का उपचार
उपचार सिस्ट के आकार, प्रकार, लक्षणों और महिला की उम्र पर निर्भर करता है।
1. निगरानी (Watchful Waiting)
यदि सिस्ट छोटी है और कोई लक्षण नहीं हैं, तो डॉक्टर कुछ महीनों तक केवल निगरानी करने की सलाह दे सकते हैं।
- नियमित अल्ट्रासाउंड
- समय-समय पर फॉलो-अप
2. दवाओं द्वारा उपचार
कुछ मामलों में हार्मोनल दवाएं या गर्भनिरोधक गोलियां दी जा सकती हैं ताकि नई सिस्ट बनने की संभावना कम हो सके।
दर्द होने पर दर्द निवारक दवाएं भी दी जा सकती हैं।
3. लैप्रोस्कोपिक सर्जरी
जब सिस्ट बड़ी हो, लगातार बढ़ रही हो, दर्द पैदा कर रही हो या कैंसर की आशंका हो, तब सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
लैप्रोस्कोपिक सिस्टेक्टॉमी के लाभ
- छोटे चीरे
- कम दर्द
- कम रक्तस्राव
- अस्पताल में कम समय तक भर्ती
- जल्दी रिकवरी
- बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम
आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीकों की सहायता से अधिकांश ओवरिअन सिस्ट को सुरक्षित रूप से हटाया जा सकता है, जबकि स्वस्थ अंडाशय को यथासंभव संरक्षित रखा जाता है।
4. रोबोटिक सर्जरी
जटिल या बड़े आकार की सिस्ट के मामलों में रोबोटिक सर्जरी भी एक प्रभावी विकल्प हो सकती है। इससे सर्जन को अधिक सटीकता और नियंत्रण प्राप्त होता है।
क्या ओवरिअन सिस्ट से कैंसर हो सकता है?
अधिकांश ओवरिअन सिस्ट कैंसर नहीं होतीं। हालांकि रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद बनने वाली कुछ सिस्ट या असामान्य विशेषताओं वाली सिस्ट में कैंसर की संभावना हो सकती है। इसलिए उचित जांच और नियमित फॉलो-अप अत्यंत महत्वपूर्ण है।
रोकथाम के उपाय
हालांकि ओवरिअन सिस्ट को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, फिर भी कुछ उपाय जोखिम को कम कर सकते हैं:
- नियमित स्त्रीरोग जांच
- मासिक धर्म में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना
- स्वस्थ वजन बनाए रखना
- हार्मोनल असंतुलन का समय पर उपचार
- PCOS जैसी स्थितियों का उचित प्रबंधन
निष्कर्ष
ओवरिअन सिस्ट एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण स्त्रीरोग संबंधी स्थिति है। अधिकांश सिस्ट हानिरहित होती हैं और अपने आप ठीक हो जाती हैं, लेकिन कुछ मामलों में समय पर निदान और उपचार आवश्यक हो सकता है। अल्ट्रासाउंड, नियमित चिकित्सकीय जांच और आधुनिक लैप्रोस्कोपिक या रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से इसका सफल उपचार संभव है। यदि आपको लगातार पेट दर्द, अनियमित मासिक धर्म या अन्य संबंधित लक्षण महसूस हों, तो स्त्रीरोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें ताकि समस्या का समय रहते समाधान किया जा सके।
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