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हिस्ट्रेक्टोमी - दूरबीन द्वारा गर्वासेय के ऑपरेशन की प्रकिया हिस्ट्रेक्टोमी सर्जरी की प्रक्रिया
General / Feb 1st, 2019 1:35 pm     A+ | a-


इस video में हिस्ट्रेक्टोमी सर्जरी की पूरी प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया गया है। दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) तकनीक द्वारा गर्भाशय निकालने की यह आधुनिक सर्जरी कम दर्द, कम ब्लीडिंग और जल्दी रिकवरी के लिए जानी जाती है। इस video में आप जानेंगे कि हिस्ट्रेक्टोमी क्यों की जाती है, ऑपरेशन कैसे किया जाता है, सर्जरी के फायदे क्या हैं और रिकवरी में कितना समय लगता है। यह video मरीजों और मेडिकल स्टूडेंट्स दोनों के लिए उपयोगी जानकारी प्रदान करता है।

सर्जन, गर्भाशय को निकालने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। सर्जरी के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया जायेगा, यह निर्भर करता है कि सर्जन को किस तकनीक में कितना अनुभव है, सर्जरी किस कारण से की जा रही है और महिला का सम्पूर्ण स्वास्थ्य कैसा है। सर्जरी की तकनीक यह भी निर्धारित करती है कि स्वास्थ्य में सुधार आने में कितना समय लगेगा और सर्जरी के दौरान उसे किस प्रकार की चोट लग सकती है।

लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी– इस प्रक्रिया में सर्जन लेप्रोस्कोप का इस्तेमाल करते हैं। लेप्रोस्कोप एक प्रकार की ट्यूब होती है, जिसके एक सिरे पर लाइट और कैमरा लगा होता है और सर्जरी करने वाले उपकरणों को पेट पर कई चीरे लगा कर या पेट के निचले भाग पर कट लगा काट अंदर डाला जाता है। इस प्रक्रिया में सर्जन शरीर में बाहर से ही, एक टीवी स्क्रीन की सहायता से पूरी प्रक्रिया करते हैं।  

हिस्ट्रेक्टोमी (Hysterectomy) वह सर्जरी है जिसमें गर्भाशय (बच्चेदानी) को हटाया जाता है। जब यह सर्जरी दूरबीन (लैप्रोस्कोपी) की मदद से की जाती है, तो इसे लैप्रोस्कोपिक हिस्ट्रेक्टोमी कहा जाता है। यह आधुनिक और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी है, जिसमें पेट पर छोटे-छोटे चीरे लगाकर कैमरा और विशेष उपकरणों की सहायता से ऑपरेशन किया जाता है।

हिस्ट्रेक्टोमी सर्जरी क्यों की जाती है

यह सर्जरी आमतौर पर इन स्थितियों में की जाती है:

गर्भाशय की गांठ (Fibroid)

असामान्य ज्यादा ब्लीडिंग

एंडोमेट्रियोसिस

गर्भाशय का कैंसर या प्रीकैंसर

गर्भाशय का नीचे खिसकना (Prolapse)

हिस्ट्रेक्टोमी के बाद महिला को पीरियड नहीं आते और गर्भधारण संभव नहीं रहता।

दूरबीन द्वारा हिस्ट्रेक्टोमी सर्जरी की प्रक्रिया

लैप्रोस्कोपिक हिस्ट्रेक्टोमी आमतौर पर इन चरणों में की जाती है:

1️⃣ ऑपरेशन से पहले तैयारी

ब्लड टेस्ट, स्कैन और अन्य जांच

8–12 घंटे उपवास

एनेस्थीसिया डॉक्टर से जांच और सलाह

2️⃣ ऑपरेशन के दौरान प्रक्रिया

मरीज को जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है

पेट पर 3–4 छोटे चीरे लगाए जाते हैं

पेट में गैस भरकर जगह बनाई जाती है

कैमरा (लैप्रोस्कोप) और उपकरण डालकर गर्भाशय अलग किया जाता है

गर्भाशय को छोटे चीरे या योनि के रास्ते बाहर निकाला जाता है

अंत में चीरे को टांके या गोंद से बंद किया जाता है

यह सर्जरी आमतौर पर 1 से 2 घंटे तक चल सकती है, हालांकि स्थिति के अनुसार समय बदल सकता है।

ऑपरेशन के बाद रिकवरी

अस्पताल में 1–2 दिन रहना पड़ सकता है

हल्का दर्द, थकान और हल्की ब्लीडिंग हो सकती है

1–2 सप्ताह में हल्के काम शुरू किए जा सकते हैं

पूरी रिकवरी सामान्यतः 2–6 सप्ताह में हो जाती है

लैप्रोस्कोपी में रिकवरी ओपन सर्जरी से तेज होती है

फायदे

कम दर्द और कम ब्लीडिंग

छोटे निशान (Scar)

जल्दी रिकवरी

कम संक्रमण का जोखिम

संभावित जोखिम

ब्लीडिंग या संक्रमण

आसपास के अंग (ब्लैडर, आंत) को नुकसान

एनेस्थीसिया से जुड़ी समस्या

ब्लड क्लॉट का खतरा

निष्कर्ष

दूरबीन द्वारा हिस्ट्रेक्टोमी एक सुरक्षित और आधुनिक सर्जरी मानी जाती है, जिसमें मरीज जल्दी ठीक होकर सामान्य जीवन में लौट सकती है। हालांकि, हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए सर्जरी का निर्णय विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।

For more information: https://www.laparoscopyhospital.com/
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