हर्निया की मरम्मत के साथ संयुक्त लैप्रोस्कोपिक ऑर्किक्टॉमी का वीडियो देखें
यह वीडियो हर्निया के साथ बिना जांच किए गए वृषण वाले रोगी में ट्रांस एब्डोमिनल प्रीपेरीटोनियल रिपेयर द्वारा क्रिप्टोकरेंसी प्रबंधन के साथ संयुक्त वंक्षण हर्निया के लिए लैप्रोस्कोपिक उपचार प्रदर्शित करता है। लैप्रोस्कोपिक हर्निया की मरम्मत एक ही ऑपरेटिव दृश्य के तहत ऑर्किक्टोमी के साथ की जाती है। वंक्षण हर्निया के साथ लगभग 7% बाल रोगी क्रिप्टोर्चिडिज़्म के साथ भी मौजूद हैं। दूसरी ओर, संयुक्त वयस्क मामले असामान्य हैं। यहाँ हम अंतर्गर्भाशयकला क्रिप्टोर्चिडिज़म के साथ संयुक्त वंक्षण हर्निया के दो वयस्क मामलों की रिपोर्ट करते हैं, जो एक ही ऑपरेटिव दृश्य के तहत ऑर्कियोडेक्टोमी के साथ टीएपीपी की मरम्मत करते हैं।
एक ही ऑपरेटिव दृश्य के तहत ऑर्कियोटमी के साथ लेप्रोस्कोपिक हर्निया की मरम्मत वयस्कों में सुरक्षित रूप से एक वंक्षण हर्निया के साथ अतिरिक्त-पेट क्रिप्टोर्चिडिज़म के साथ किया जा सकता है। यह प्रक्रिया ऐसे वयस्क रोगियों के इलाज के लिए एक विकल्प हो सकती है। क्रिप्टोर्चिडिज़्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक या दोनों वृषण जन्म से पहले अंडकोश में उतरने में विफल हो जाते हैं। नवजातों की अवधि के दौरान अनिच्छुक वृषण की आवृत्ति 4.1-6.9%, 3 महीने की उम्र तक 1.0-1.6%, 1 साल की उम्र में 1.0-1.7% और 1 साल की उम्र के बाद 1.0% से कम बताई गई है। वयस्क मामलों के लिए भी ऑर्किक्टोमी की सिफारिश की जाती है क्योंकि क्रिप्टोर्चिडिज़्म वाले वयस्क रोगियों में पहले से ही शुक्राणुजन्य कार्यों की कमी होती है और उनमें नियोप्लाज्म का खतरा होता है।
वर्ल्ड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल में डॉ. आर.के. मिश्रा द्वारा लैप्रोस्कोपिक ऑर्किेक्टॉमी और हर्निया रिपेयर का संयोजन
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी ने आधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धति में क्रांति ला दी है, क्योंकि यह न्यूनतम चीर-फाड़ वाली प्रक्रियाओं के साथ-साथ तेजी से रिकवरी, कम दर्द और बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम प्रदान करती है। ऐसी ही एक उन्नत और प्रभावी प्रक्रिया है लैप्रोस्कोपिक ऑर्किेक्टॉमी और साथ ही हर्निया रिपेयर का संयोजन। वर्ल्ड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल में डॉ. आर.के. मिश्रा द्वारा कुशलतापूर्वक प्रदर्शित यह दोहरा दृष्टिकोण, शल्य चिकित्सा तकनीकों के विकास को दर्शाता है जो रोगी की सुरक्षा, सटीकता और सर्वोत्तम परिणामों को प्राथमिकता देते हैं।
लैप्रोस्कोपिक ऑर्किेक्टॉमी में न्यूनतम चीर-फाड़ वाली तकनीकों का उपयोग करके एक या दोनों अंडकोषों को निकालना शामिल है। यह आमतौर पर अंडकोष के नीचे न उतरने, अंडकोषीय ट्यूमर या निष्क्रिय अंडकोष जैसे मामलों में किया जाता है। परंपरागत रूप से ओपन सर्जरी के माध्यम से की जाने वाली इस प्रक्रिया में, लैप्रोस्कोपिक दृष्टिकोण पेट की गुहा का बेहतर दृश्य प्रदान करता है, जिससे सर्जन शारीरिक संरचनाओं की सटीक पहचान और सुरक्षित प्रबंधन कर सकते हैं। हर्निया की मरम्मत, विशेष रूप से इंगुइनल हर्निया की मरम्मत के साथ किए जाने पर, यह तकनीक और भी अधिक लाभदायक हो जाती है, क्योंकि अक्सर दोनों स्थितियाँ एक साथ मौजूद होती हैं और एक ही सर्जिकल सत्र में उनका उपचार किया जा सकता है।
वर्ल्ड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल में, डॉ. आर.के. मिश्रा इस संयुक्त प्रक्रिया के लिए एक व्यवस्थित और मानकीकृत दृष्टिकोण पर जोर देते हैं। सर्जरी की शुरुआत न्यूमोपेरिटोनियम स्थापित करने और लैप्रोस्कोपिक पोर्ट डालने से होती है। एक हाई-डेफिनिशन कैमरे का उपयोग करके, सर्जन पेट की गुहा का सावधानीपूर्वक निरीक्षण करते हैं। अंडकोष के नीचे न उतरने की स्थिति में, गोनाडल वाहिकाओं और वास डेफरेंस की पहचान की जाती है, उन्हें क्लिप किया जाता है और सटीकता से विभाजित किया जाता है। इसके बाद, एंडोस्कोपिक रिट्रीवल बैग का उपयोग करके अंडकोष को गतिशील किया जाता है और निकाला जाता है, जिससे ऊतकों को न्यूनतम क्षति पहुँचती है और संक्रमण से बचा जा सकता है।
ऑर्किेक्टोमी के बाद, हर्निया की मरम्मत पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। कमजोर पेट की दीवार को मजबूत करने के लिए लैप्रोस्कोपिक दृष्टिकोण—आमतौर पर ट्रांसएब्डोमिनल प्रीपेरिटोनियल (टीएपीपी) या टोटली एक्स्ट्रापेरिटोनियल (टीईपी) तकनीक—का उपयोग किया जाता है। हर्निया के दोष पर एक सिंथेटिक जाली लगाई जाती है, जो टिकाऊ सहारा प्रदान करती है और पुनरावृत्ति के जोखिम को काफी हद तक कम करती है। इस एक साथ की जाने वाली प्रक्रिया से दूसरी सर्जरी की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिससे समग्र स्वास्थ्य देखभाल लागत, एनेस्थीसिया का उपयोग और रोगी की असुविधा कम हो जाती है।
संयुक्त लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया के अनेक लाभ हैं। रोगियों को ऑपरेशन के बाद कम दर्द होता है, अस्पताल में कम समय तक रहना पड़ता है और वे जल्दी ही अपनी दैनिक गतिविधियों में लौट आते हैं। इसके अलावा, लैप्रोस्कोपी द्वारा प्रदान किया गया बड़ा (magnified) दृश्य सर्जिकल सटीकता को बढ़ाता है, जिससे रक्तस्राव या आसपास की संरचनाओं को चोट लगने जैसी जटिलताओं का जोखिम कम हो जाता है। छोटे चीरों (incisions) का कॉस्मेटिक लाभ भी रोगी की संतुष्टि को और बढ़ाता है।
इस प्रक्रिया का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका शैक्षिक महत्व है। वर्ल्ड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी प्रशिक्षण के लिए एक वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में कार्य करता है। डॉ. आर.के. मिश्रा के मार्गदर्शन में, दुनिया भर के सर्जन संयुक्त लैप्रोस्कोपिक प्रक्रियाओं जैसी उन्नत तकनीकों में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं। उनकी शिक्षण पद्धति स्पष्टता, चरण-दर-चरण प्रदर्शन और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन पर केंद्रित है, जिससे प्रशिक्षुओं को आत्मविश्वास के साथ जटिल सर्जरी में महारत हासिल करने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष रूप में, हर्निया की मरम्मत के साथ संयुक्त लैप्रोस्कोपिक ऑर्किइक्टोमी, न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी (minimally invasive surgery) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करती है। यह तकनीक न केवल नैदानिक परिणामों में सुधार करती है, बल्कि सर्जिकल देखभाल की दक्षता को भी बढ़ाती है। वर्ल्ड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल में डॉ. आर.के. मिश्रा का कार्य, सर्जिकल नवाचार और शिक्षा में उत्कृष्टता का एक बेहतरीन उदाहरण है। जैसे-जैसे लैप्रोस्कोपिक कौशल विकसित होते रहेंगे, ऐसी संयुक्त प्रक्रियाएं व्यापक और रोगी-केंद्रित देखभाल प्रदान करने में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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