सल्पिंगो-ओओफ़ोरेक्टोमी अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब को हटाने के लिए सर्जरी है। एक अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब को हटाने को एकतरफा सलापिंगो-ओओफ़ोरेक्टोमी कहा जाता है। जब दोनों को हटा दिया जाता है, तो इसे द्विपक्षीय सैल्पिंगो-ओओफोरेक्टोमी कहा जाता है। इस प्रक्रिया का उपयोग डिम्बग्रंथि के कैंसर सहित विभिन्न स्थितियों के इलाज के लिए किया जाता है। लैप्रोस्कोपिक या रोबोट द्विपक्षीय सल्पिंगो-ओओफ़ोरेक्टोमी के बाद आपके सामान्य गतिविधि स्तर पर लौटने में तीन सप्ताह तक का समय लग सकता है। जिन रोगियों को एक खुला द्विपक्षीय सैल्पिंगो-ओओफ़ोरेक्टोमी है, उन्हें सर्जरी के बाद कुछ दिनों के लिए अस्पताल में ठीक होने की आवश्यकता होगी।
द्विपक्षीय सैलीपिंग ओओफोरेक्टोमी आर. के. मिश्रा द्वारा वर्ल्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल में
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी ने स्त्री-रोगों के उपचार को अधिक सुरक्षित, सटीक और कम दर्दनाक बना दिया है। इसी उन्नत तकनीक का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है द्विपक्षीय सैलीपिंग ओओफोरेक्टोमी (Bilateral Salpingo-Oophorectomy), जिसमें दोनों फैलोपियन ट्यूब और दोनों अंडाशयों को शल्यक्रिया के माध्यम से हटाया जाता है। भारत में इस प्रकार की उन्नत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के क्षेत्र में डॉ. आर. के. मिश्रा का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है, जो वर्ल्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल में इस प्रक्रिया को अत्यधिक कुशलता और आधुनिक तकनीक के साथ सम्पन्न करते हैं।
द्विपक्षीय सैलीपिंग ओओफोरेक्टोमी सामान्यतः उन मरीजों में की जाती है जिन्हें अंडाशय में ट्यूमर, गंभीर एंडोमेट्रियोसिस, बार-बार होने वाले सिस्ट, या कैंसर का उच्च जोखिम होता है। इस सर्जरी का उद्देश्य रोगग्रस्त अंगों को हटाकर रोग की प्रगति को रोकना और मरीज के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना होता है। पहले यह ऑपरेशन पारंपरिक ओपन सर्जरी के माध्यम से किया जाता था, जिसमें बड़ा चीरा लगाना पड़ता था और मरीज को ठीक होने में अधिक समय लगता था। लेकिन लैप्रोस्कोपिक तकनीक के आने से यह प्रक्रिया अब बहुत अधिक सुरक्षित और कम जटिल हो गई है।
वर्ल्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल में डॉ. आर. के. मिश्रा द्वारा की जाने वाली यह सर्जरी अत्याधुनिक उपकरणों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार की जाती है। लैप्रोस्कोपी में पेट पर छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं, जिनके माध्यम से एक कैमरा और विशेष सर्जिकल उपकरण अंदर डाले जाते हैं। कैमरे की सहायता से सर्जन शरीर के अंदर की संरचना को बड़ी स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से देख पाते हैं, जिससे सर्जरी अत्यधिक सटीकता के साथ की जा सकती है।
इस प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले मरीज को सामान्य एनेस्थीसिया दिया जाता है। इसके बाद पेट में कार्बन डाइऑक्साइड गैस भरकर कार्य क्षेत्र बनाया जाता है। लैप्रोस्कोप के माध्यम से अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब को सावधानीपूर्वक अलग किया जाता है और विशेष उपकरणों की सहायता से उन्हें सुरक्षित रूप से निकाल लिया जाता है। पूरी प्रक्रिया के दौरान रक्तस्राव को न्यूनतम रखने और आसपास के अंगों को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
लैप्रोस्कोपिक द्विपक्षीय सैलीपिंग ओओफोरेक्टोमी के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं। इसमें छोटे चीरे होने के कारण दर्द कम होता है, संक्रमण का खतरा कम रहता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है। इसके अलावा अस्पताल में रहने की अवधि भी कम होती है और शरीर पर निशान भी बहुत छोटे रहते हैं। यही कारण है कि आज यह तकनीक स्त्री-रोग संबंधी सर्जरी में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
डॉ. आर. के. मिश्रा न केवल एक कुशल सर्जन हैं बल्कि वे विश्वभर के डॉक्टरों को लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का प्रशिक्षण भी देते हैं। वर्ल्ड लेप्र्रोस्कोपी हॉस्पिटल एक अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है, जहां विभिन्न देशों से डॉक्टर आधुनिक न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी सीखने आते हैं। यहाँ की उन्नत सुविधाएँ और विशेषज्ञता इस संस्थान को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित बनाती हैं।
अंततः कहा जा सकता है कि द्विपक्षीय सैलीपिंग ओओफोरेक्टोमी जैसी जटिल सर्जरी को आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक के माध्यम से सुरक्षित और प्रभावी ढंग से करना चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डॉ. आर. के. मिश्रा और वर्ल्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल का योगदान इस दिशा में अत्यंत सराहनीय है, जो मरीजों को बेहतर उपचार और डॉक्टरों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।
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