पेट या कमर के आसपास दिखाई देने वाला उभार हमेशा सामान्य नहीं होता। कई मामलों में यह हर्निया का संकेत हो सकता है। हर्निया तब विकसित होता है जब पेट की दीवार या किसी अन्य मांसपेशीय संरचना का कमजोर हिस्सा आसपास के ऊतक या अंग को बाहर की ओर आने की अनुमति देता है। यह उभार शुरुआत में छोटा हो सकता है, लेकिन समय के साथ बढ़ सकता है और शारीरिक गतिविधियों के दौरान दर्द, असहजता या भारीपन का कारण बन सकता है।
हर्निया किसी भी उम्र में हो सकता है। बच्चों में कुछ हर्निया जन्मजात कमजोरी के कारण दिखाई देते हैं, जबकि वयस्कों में उम्र बढ़ने, मांसपेशियों की कमजोरी और पेट के अंदर बढ़े हुए दबाव के कारण इसका जोखिम बढ़ सकता है। मोटापा, लंबे समय तक रहने वाली खांसी, कब्ज, बार-बार भारी वजन उठाना और अत्यधिक जोर लगाने जैसी स्थितियां भी पेट की दीवार पर दबाव बढ़ा सकती हैं। इसके अतिरिक्त, पहले की गई abdominal surgery के चीरे वाली जगह कमजोर होने पर इंसिजनल हर्निया विकसित हो सकता है।
हर्निया के प्रकार की पहचान उसके स्थान के आधार पर की जाती है। कमर के क्षेत्र में होने वाला इंग्वाइनल हर्निया बहुत सामान्य है। नाभि के आसपास होने वाला अम्बिलिकल हर्निया भी अक्सर देखा जाता है। फेमोरल हर्निया जांघ के ऊपरी हिस्से में हो सकता है, जबकि पहले ऑपरेशन के चीरे की जगह पर बनने वाला हर्निया इंसिजनल हर्निया कहलाता है। इसके अलावा, डायाफ्राम से संबंधित हायटल हर्निया अलग प्रकार की समस्या है और इसके लक्षण अन्य पेट के हर्निया से अलग हो सकते हैं।
हर्निया का सबसे प्रमुख संकेत किसी स्थान पर दिखाई देने वाला या महसूस होने वाला उभार है। खड़े होने, खांसने, छींकने, व्यायाम करने या वजन उठाने पर यह उभार अधिक स्पष्ट हो सकता है। कुछ लोगों को दर्द, खिंचाव, भारीपन या जलन महसूस होती है, जबकि कुछ मरीजों में लंबे समय तक कोई विशेष लक्षण नहीं होते। इसी कारण नियमित चिकित्सकीय मूल्यांकन महत्वपूर्ण है, खासकर जब उभार धीरे-धीरे बढ़ रहा हो।
हर हर्निया का इलाज एक जैसा नहीं होता। डॉक्टर मरीज की जांच करके हर्निया का प्रकार, आकार और गंभीरता निर्धारित करते हैं। कुछ मामलों में निगरानी की जा सकती है, लेकिन लक्षण वाले या बढ़ते हुए हर्निया में सर्जिकल उपचार की आवश्यकता हो सकती है। आधुनिक मिनिमली इनवेसिव और लैप्रोस्कोपिक हर्निया सर्जरी में छोटे चीरे और विशेष कैमरा एवं उपकरणों की सहायता से हर्निया की मरम्मत की जाती है। उपयुक्त मरीज में यह तकनीक कम से कम आक्रामक तरीके से उपचार का विकल्प प्रदान कर सकती है।
यदि हर्निया का उभार अचानक बहुत दर्दनाक हो जाए, कठोर महसूस हो, अंदर वापस न जाए या उसके साथ उल्टी, पेट फूलना अथवा मल-पास करने में समस्या हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। ऐसी स्थिति में आंत के फंसने या रक्त आपूर्ति प्रभावित होने जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
हर्निया का सही समय पर निदान और उचित उपचार मरीज को आगे होने वाली जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकता है। इसलिए पेट, नाभि या कमर में लगातार उभार या दर्द होने पर स्वयं उपचार करने के बजाय योग्य सर्जन से परामर्श लेना बेहतर है।