हिस्टेरेक्टॉमी क्यों की जाती है? बच्चेदानी निकालने की सर्जरी से पहले जानें जरूरी बातें
Vimeo / Aug 13th, 2026 1:22 pm     A+ | a-


हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy) एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें महिला की बच्चेदानी यानी गर्भाशय (Uterus) को ऑपरेशन द्वारा निकाला जाता है। यह एक महत्वपूर्ण स्त्री रोग संबंधी सर्जरी है, जिसे डॉक्टर मरीज की बीमारी, उम्र, लक्षण, भविष्य की प्रजनन योजना और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर सलाह देते हैं। हर महिला के लिए हिस्टेरेक्टॉमी आवश्यक नहीं होती और कई स्थितियों में पहले दवाओं या अन्य उपचार विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

हिस्टेरेक्टॉमी की जरूरत कई परिस्थितियों में पड़ सकती है। इसके सामान्य कारणों में गर्भाशय में फाइब्रॉइड, अत्यधिक या लंबे समय तक होने वाला मासिक धर्म रक्तस्राव, एडेनोमायोसिस, एंडोमेट्रियोसिस, गर्भाशय का नीचे खिसकना (यूटेरिन प्रोलैप्स), कुछ प्रकार के कैंसर या कैंसर-पूर्व स्थितियां तथा अन्य गंभीर स्त्री रोग संबंधी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि, ऑपरेशन का निर्णय केवल बीमारी के नाम के आधार पर नहीं किया जाता, बल्कि पूरी चिकित्सकीय जांच के बाद लिया जाता है।

हिस्टेरेक्टॉमी कई तरीकों से की जा सकती है। एब्डॉमिनल हिस्टेरेक्टॉमी में पेट पर चीरा लगाकर गर्भाशय निकाला जाता है। वेजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी में योनि के रास्ते गर्भाशय निकाला जाता है। इसके अलावा उपयुक्त मरीजों में लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी या अन्य मिनिमली इनवेसिव तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। कुछ मामलों में रोबोटिक सहायता से भी सर्जरी की जा सकती है, यदि उपलब्ध हो और मरीज के लिए चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त हो।

यह समझना भी जरूरी है कि हिस्टेरेक्टॉमी के दौरान हमेशा अंडाशय निकालना आवश्यक नहीं होता। गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स), फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय से संबंधित निर्णय बीमारी और मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए सर्जरी से पहले डॉक्टर से यह स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि कौन-से अंग निकाले जाएंगे और क्यों।

हिस्टेरेक्टॉमी के बाद महिला गर्भधारण नहीं कर सकती क्योंकि गर्भाशय निकाल दिया जाता है। यदि अंडाशय सुरक्षित रखे जाते हैं, तो शरीर में हार्मोन का प्राकृतिक उत्पादन जारी रह सकता है। यदि दोनों अंडाशय भी निकालने पड़ते हैं, तो उम्र और परिस्थिति के अनुसार हार्मोनल प्रभाव अलग हो सकते हैं।

सर्जरी से पहले डॉक्टर आमतौर पर मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और आवश्यक जांच रिपोर्टों का मूल्यांकन करते हैं। ऑपरेशन के बाद रिकवरी का समय सर्जरी की तकनीक, मरीज की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति और किए गए ऑपरेशन की प्रकृति पर निर्भर करता है। मिनिमली इनवेसिव सर्जरी में कई मरीजों को पारंपरिक बड़े चीरे वाली सर्जरी की तुलना में अपेक्षाकृत कम अस्पताल प्रवास और तेजी से सामान्य गतिविधियों की ओर लौटने का लाभ मिल सकता है, लेकिन परिणाम हर मरीज में अलग हो सकते हैं।

इस विषय को समझना महिलाओं के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हिस्टेरेक्टॉमी एक बड़ा और स्थायी निर्णय है। यदि डॉक्टर ने यह सर्जरी सुझाई है, तो मरीज को सर्जरी का कारण, उपलब्ध वैकल्पिक उपचार, किस प्रकार की हिस्टेरेक्टॉमी की जाएगी, कौन-से अंग निकाले जाएंगे, संभावित जोखिम, रिकवरी अवधि और भविष्य के स्वास्थ्य पर प्रभाव के बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए।

यह शैक्षणिक जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी विशेष मरीज में हिस्टेरेक्टॉमी की आवश्यकता और सबसे उपयुक्त सर्जिकल विधि का निर्णय योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा व्यक्तिगत जांच और रिपोर्टों के आधार पर किया जाना चाहिए।

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