लेप्रोस्कोपिक पित्ताशय की थैली की सर्जरी (कोलेसिस्टेक्टोमी) पेट में कई छोटे कटौती (चीरों) के माध्यम से पित्ताशय की थैली और पित्त पथरी को निकाल देती है। सर्जन स्पष्ट रूप से देखने के लिए हवा या कार्बन डाइऑक्साइड के साथ आपके पेट को फुलाता है।
सर्जन बेली बटन के पास एक चीरा में एक वीडियो कैमरा (लैप्रोस्कोप) से जुड़े एक हल्के दायरे को सम्मिलित करता है। सर्जन तब आपके पित्ताशय की थैली को हटाने के लिए अन्य चीरों में सर्जिकल उपकरणों को सम्मिलित करते हुए एक गाइड के रूप में एक वीडियो मॉनिटर का उपयोग करता है।
सर्जन पित्ताशय की थैली को हटाने से पहले, आपके पास एक विशेष एक्स-रे प्रक्रिया हो सकती है जिसे इंट्राऑपरेटिव कोलेजनियोग्राफी कहा जाता है, जो पित्त नलिकाओं की शारीरिक रचना को दर्शाता है।
सर्जरी के बाद, पित्त यकृत से (जहां इसे बनाया जाता है) आम पित्त नली के माध्यम से और छोटी आंत में प्रवाहित होता है। क्योंकि पित्ताशय की थैली को हटा दिया गया है, शरीर भोजन के बीच पित्त को स्टोर नहीं कर सकता है। ज्यादातर लोगों में, यह पाचन पर बहुत कम या कोई प्रभाव नहीं डालता है।
गॉल ब्लैडर स्टोन सर्जरी – डॉ. आर. के. मिश्रा द्वारा वर्ल्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल में
गॉल ब्लैडर स्टोन (पित्ताशय की पथरी) आज के समय में एक आम समस्या बनती जा रही है। यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब पित्ताशय में पित्त (बाइल) के तत्व ठोस कणों में बदलकर पत्थर का रूप ले लेते हैं। इससे पेट के दाहिने हिस्से में दर्द, उल्टी, अपच, गैस और कभी-कभी गंभीर संक्रमण जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में सर्जरी सबसे प्रभावी उपचार माना जाता है। आधुनिक चिकित्सा में लैप्रोस्कोपिक तकनीक के माध्यम से गॉल ब्लैडर स्टोन सर्जरी सुरक्षित, कम दर्दनाक और तेज़ रिकवरी वाली प्रक्रिया बन चुकी है।
Dr. R. K. Mishra द्वारा की जाने वाली गॉल ब्लैडर स्टोन सर्जरी आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण है। वे विश्व-प्रसिद्ध लैप्रोस्कोपिक सर्जन और शिक्षक हैं, जिन्होंने हजारों सर्जनों को मिनिमल एक्सेस सर्जरी का प्रशिक्षण दिया है। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव के कारण यह सर्जरी अत्यंत सटीक और सुरक्षित तरीके से की जाती है।
यह सर्जरी World Laparoscopy Hospital में अत्याधुनिक उपकरणों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार की जाती है। इस अस्पताल को लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी के प्रशिक्षण तथा उपचार के लिए विश्व स्तर पर जाना जाता है। यहाँ अनुभवी सर्जनों की टीम और उन्नत तकनीक मरीजों को बेहतर उपचार प्रदान करती है।
लैप्रोस्कोपिक गॉल ब्लैडर स्टोन सर्जरी में पेट पर छोटे-छोटे चीरे लगाए जाते हैं। इन चीरों के माध्यम से एक कैमरा (लैप्रोस्कोप) और विशेष सर्जिकल उपकरण अंदर डाले जाते हैं। कैमरे से मिलने वाली हाई-डेफिनिशन तस्वीरें मॉनिटर पर दिखाई देती हैं, जिससे सर्जन को पित्ताशय को सुरक्षित रूप से निकालने में सहायता मिलती है। इस प्रक्रिया को लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी कहा जाता है। पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में इसमें कम दर्द, कम रक्तस्राव और जल्दी ठीक होने की संभावना होती है।
इस सर्जरी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि मरीज को अस्पताल में कम समय रहना पड़ता है और वह जल्दी अपने सामान्य जीवन में वापस लौट सकता है। छोटे चीरे होने के कारण शरीर पर निशान भी बहुत कम दिखाई देते हैं। साथ ही संक्रमण का खतरा भी अपेक्षाकृत कम होता है।
वर्ल्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल में डॉ. आर. के. मिश्रा द्वारा की जाने वाली गॉल ब्लैडर स्टोन सर्जरी न केवल मरीजों के लिए सुरक्षित और प्रभावी है, बल्कि यह आधुनिक चिकित्सा तकनीक की प्रगति को भी दर्शाती है। उनकी विशेषज्ञता, उन्नत उपकरणों और उच्च स्तर की चिकित्सा सेवाओं के कारण यह अस्पताल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के क्षेत्र में विश्वभर में प्रसिद्ध है।
अंततः कहा जा सकता है कि गॉल ब्लैडर स्टोन की समस्या के लिए लैप्रोस्कोपिक सर्जरी एक अत्यंत प्रभावी समाधान है। अनुभवी सर्जन और आधुनिक सुविधाओं के साथ जब यह सर्जरी की जाती है, तो मरीज को बेहतर परिणाम और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिलता है। यही कारण है कि वर्ल्ड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल में डॉ. आर. के. मिश्रा द्वारा की जाने वाली यह सर्जरी चिकित्सा क्षेत्र में एक उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।