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बच्चेदानी से रसौली निकालने की सर्जरी क्या है ओर दूरबीन द्वारा इसे कैसे की जाती है |
स्त्रीरोग संबंधी लैपरोस्कोपी / Jan 19th, 2020 4:20 am     A+ | a-


आजकल महिलाओं में रसौली बनने की शिकायत ज्यादा हो रही है इसका कारण हमारी दिनचर्या है बाहर का ज्यादा खाना , धूम्रपान ,ज्यादा उम्र में गर्भधारण करना, गर्भ रोकने की दवा(oral contraceptive pills) आदि हैं मासिक धर्म ज्यादा आना और पेल्विक हिस्से में दर्द इसके लक्षण हैं।

पहले महिलाओं की बच्चेदानी में रसौली होने पर पूरे गर्भाशय को निकाल दिया जाता था और उसके बाद वो महिला  गर्भवती नहीं हो सकती थी।परंतु अब सर्जरी से बस रसौली निकाली जा सकती है जो महिलाएं किसी कारणवश पूरे गर्भाशय को नहीं निकलवाना चाहती वह सिर्फ रसौली निकलवा सकती हैं इसके बाद गर्भधारण करने में भी कोई परेशानी नहीं होती इस सर्जरी में हिस्टेरेक्टोमी (Hysterectomy)सर्जरी की तरह पूरा गर्भाशय नहीं निकाला जाता है।
मायोमेक्टोमी (Myomectomy)सिर्फ गर्भाशय में मौजूद रसौली को निकालने की प्रक्रिया है।  यदि महिला सर्जरी के बाद भी मां बनना चाहती है तो उसे हिस्टेरेक्टोमी सर्जरी (पूरे गर्भाशय को निकालना)की जगह मायोमेक्टोमी सर्जरी करानी चाहिए।

सर्जरी से पहले की तैयारी :

सर्जरी से पहले आपको अपने शरीर की कुछ टेस्ट /जांच करानी पड़ती है और हॉरमोन ट्रीटमेंट लेना पड़ता है यह 2 से 6 महीने पहले लेना पड़ता है जिसमें मरीजों को दवा दी जाती जाती है जिसमें मासिक धर्म चक्र भी बंद हो जाता और सर्जरी के दौरान खून की कमी नहीं होती और इस दवा से रसौली पैदा करने वाले फाइब्रॉयड्स को सिकुड़ने में मदद मिलती है जिससे इनका आकार छोटा हो जाता है और उन्हें निकालने में आसानी होती है

सर्जरी की प्रक्रिया :

इस सर्जरी में मरीज को पहले एनेस्थेसिया दिया जाता है उसके बाद पेट के निचले हिस्से के द्वारा गर्भाशय में चीरा लगाया जाता है नाभि से बिल्कुल नीचे चीरा लगाया जाता है यह नाभि और प्यूबिक हड्डी के बीच लगाया जाता है और यह चीरा रसोली के आकार के अनुरूप होता है अगर रसौली बड़ी हो तो चीरा बड़ा लगाया जाता है और गर्भाशय से रसौली निकाल कर उसके बाद टांके लगा दिए जाते हैं सर्जरी के बाद कुछ दिन तक महिला को अस्पताल में रुकना पड़ता है।

दूरबीन से बच्चेदानी की रसौली का ऑपरेशन :

दूरबीन शल्य चिकित्सा पद्धति को लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कहा जाता है यह चिकित्सा की अत्याधुनिक पद्धति है दूरबीन सर्जरी में मुख्य रूप से एक टेलीस्कोप को वीडियो कैमरा के साथ जोड़ा जाता है और कैमरे को छोटे चीरे के द्वारा जो नाभि के नीचे लगाया जाता है पेट में डाला जाता है। यह बहुत छोटा चीरा होता है लगभग बस 0.5 सेंटीमीटर का। और संपूर्ण पेट की जांच की जाती है दूरबीन विधि में पेट के अंदर के सारे अंग और मांसपेशियों के बड़े चित्र टीवी मॉनिटर पर साफ दिखते हैं और उन्हें देखकर ही ऑपरेशन किया जाता है जिससे गलती की संभावना काफी कम रहती है इस सर्जरी के लिए विशेष औजारों की आवश्यकता होती है इस सर्जरी में बहुत ही छोटे चीरे लगाए जाते हैं मात्र 0.5 सेंटीमीटर के दो चीरे और कभी-कभी एक में ही काम चल जाता है। इस सर्जरी कीविधि के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड गैस अंदर डाली जाती है जिससे पेट अच्छे से फूल जाता है जिससे अंदर आसानी से औजार डल सके। यह गैस पूर्णतः नुकसान रहित है।उसके बाद रसौली को अंदर ही तोड़ा जाता है और बाहर निकाल दिया जाता है।दूरबीन सर्जरी में पेट की मांसपेशियों को नहीं काटा जाता है।

दूरबीन से की जाने वाली सर्जरी दर्द रहित, सुरक्षित ,शीघ्र होने वाली एवं किफायती है।मरीज 1 दिन बाद ही घूम फिर सकता है इसमें जल्दी स्वास्थ्य लाभ होता है और मरीज उसी दिन अपने घर भी जा सकता है।इस सर्जरी में संक्रमण होने की संभावना बहुत कम होती है बहुत कम खून निकलता है और सर्जरी के बाद होने वाली हर्निया की समस्या भी नहीं होती।

दूरबीन सर्जरी किसी अनुभवी और क्वालिफाइड सर्जन से ही करानी चाहिए
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