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लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के लाभ
सामान्य सर्जरी लैप्रोस्कोपी / Jun 13th, 2017 11:40 am     A+ | a-

लैप्रोस्कोपी सर्जरी के लाभ क्या हैं?
 
पिछले 15 वर्षों में तकनीक ने सर्जरी के कई तरीकों को बदल दिया है। अब कई वैकल्पिक और आपातकालीन सर्जरी लेपरसस्कोपिक रूप से की जा सकती हैं।

लैप्रोस्कोपिक वह सर्जरी है जहां सर्जन बहुत ही छोटा चीरा लगाता है, जो अक्सर रोगी के पेट के बेली बटन में लगाया जाता है, और इस चीरा का उपयोग पेट गुहा में एक कैमरा को ले जाने के लिए किया जात है, जिसे लैप्रोस्कोप कहते हैं। उसके बाद सर्जन ऑपरेशन करने के लिए एक टेलीविजन स्क्रीन पर देखता है। इसके बाद सर्जन के संचालन के लिए पेट के अंदर एक एयर पॉकेट बनाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड, एक गैर-विषैली और गंधहीन गैस उपयोग की जाती है।

ऑपरेशन के आधार पर, आधे इंच के आकार से कम एक या एक से अधिक चीरे लगाये जाते हैं,   इस प्रक्रिया को पेट में सर्जिकल उपकरणों को डालने के लिए किया जाता है। चीरों को आम तौर पर टांके के साथ बंद कर दिया जाता है जो बाद में गल जाते हैं ताकि मरीजों को टांके या स्टेपल को हटाने की असुविधा से गुज़रना ना पड़े।
 
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के लाभ
 
अब इन दिनों लैप्रोस्कोपिक सर्जरी सामान्यतः की जाती है। परंपरागत सर्जरी के ऊपर लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के कुछ निहित फायदों के कारण पारंपरिक सर्जरी की संख्या में कमी आई है:
 
छोटी चीरे: खुले पेट की सर्जरी के दौरान, सर्जरी के लक्षण के आधार पर, चीरों की सामान्य लंबाई 3 सेंटीमीटर से 18 सेंटीमीटर तक होती है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के चीरें छोटे होते हैं (आमतौर पर 0.5 सेमी से लेकर 1.5 सेमी तक)।

कम दर्द: चीरों का आकार छोटा होने के कारण शल्य चिकित्सा के बाद दर्द और रक्तस्राव का जोखिम भी कम होता है। जब एक बड़ा चीरा लगाया जाता है तब मरीज़ों को आमतौर पर लंबी अवधि के लिए दर्द से राहत की दवा की आवश्यकता होती है, तब सिलाई रेखा ठीक होती है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के साथ, पोस्ट सर्जिकल घाव बहुत कम होते है और उपचार प्रक्रिया बहुत कम दर्दनाक होती है।

जल्द आरोग्य प्राप्ति: शल्य चिकित्सा के बाद कम दर्द से रिकवरी की प्रक्रिया में तेजी आती है और मरीज रोजमर्रा की जिंदगी में तेजी से वापस लौट पाता है।  
दर्द की दवाओं का कम सेवन: सर्जरी के बाद कम दर्द होने के कारण दर्द निवारण दवाओं का कम मात्रा में सेवन ।

अस्पताल में कम समय के लिए रहना: लम्बी अवधि के लिए अस्पताल में रहने की आवश्यकता लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में काफी कम है, क्योंकि इसका उपचार बहुत तेज है। अधिकांश रोगियों को एक ही दिन या अगले दिन में ​ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है और खुली सर्जरी की प्रक्रिया के मुकाबले वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अधिक तेजी से लौट पाते हैं। खुली सर्जरी में रोगी को 5 से 7 दिन में अस्पताल से छुट्टी दी जाती है।

कम घाव संक्रमण और हर्निया गठन: छोटे चीरों में घाव के संक्रमण और हर्निया गठन की संभावना के जोखिम में कमी आती है।

सौन्दर्य दृष्टि से स्वीकार्य: छोटे चीरे सर्जरी के बाद काफी छोटे निशान पैदा करते है। उन मामलों में जहां सर्जिकल घाव बड़ा होता है, निशान के ऊतकों में संक्रमण होने की संभावना अधिक होती है और साथ ही वे हर्नियेशन के लिए भी अधिक संवेदनशील हो सकते हैं, विशेष रूप से अधिक वजन वाले और मोटापे वाले मरीजों में।

संक्रमण की कम संभावनाएं: आंतरिक अंगों के बाह्य वातरवरण के सम्पर्क में ना आने से वातावरण में मौजूद प्रदूषकों से होने वाले संक्रमण का जोखिम कम रहता है।

कम रक्तस्राव: इस सर्जरी के दौरान रक्तस्राव का खतरा कम हो जाता है क्योंकि इस सर्जरी में खुली सर्जरी के मुकाबले चीरे बहुत छोटे होते हैं। इससे रक्तस्राव की संभावना कम हो जाती है।

कम चयापचय व्यंग्यात्मक: चिकित्सा साहित्य इस तथ्य का समर्थन करता है कि खुले पेट की सर्जरी के मुकाबले लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद चयापचय की समस्याएं होने की सम्भावना कम होती  हैं।

बेहतर पश्चातक फेफडों का कार्य: फेफडों का कार्य, अर्थात् लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद से सांस लेने और सांस छोडने की क्षमता कम से कम प्रभावित होती है जोकि रिकवरी की प्रक्रिया को तेज करने में मदद करती है।
 
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